भाेपाल (वंदना श्राेती). भाेपाल में देश की पहली ई-वेस्ट क्लीनिक खाेली जा रही है। इसका शुभारंभ 23 जनवरी काे एमपी नगर-जाेन 1 में होगा। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) ने ई-वेस्ट की प्राेसेसिंग के लिए भाेपाल काे पायलट प्राेजेक्ट के तहत चुना है। प्राेजक्ट सफल हाने पर इस माॅडल काे पूरे भारत में लागू किया जाएगा। एमपी नगर जाेन-1 के अलावा अरेरा काॅलाेनी, न्यू मार्केट, बैरागढ़ और हाेशंगाबाद राेड पर ई-वेस्ट क्लीनिक स्थापित की जाएगी। खास बात यह क्लीनिक कंडम लो फ्लोर बस में तैयार की जा रही है। इस क्लीनिक में वैज्ञानिक तरीके से ई वेस्ट का कलेक्शन, निस्तारण हाेगा। इस प्राेजेक्ट के लिए अगस्त में सीपीसीबी और नगर निगम के बीच आपसी सहमति बनी थी। इसके तहत यह शुरुआत की जा रही है।
ऐसी है ई क्लीनिक
ई-वेस्ट क्लीनिक के लिए कंडम लो फ्लोर बस का उपयोग किया है। इसे अंदर से ई-वेस्ट से ही सजाया है। इसमें एक टीवी लगाई जा रही है जिसमें ई-वेस्ट से पर्यावरण काे हाेने वाले नुकसान के विषय में छाेटी-छाेटी डाक्यूमेंट्री फिल्म दिखाई जाएंगी। बस में दाे पार्टिशन किए जाएंगे। एक जगह ई-वेस्ट काे ताैला जाएगा। दूसरे में अलग-अलग ई-कचरा रखा जाएगा। भाेपाल शहर में हर साल 435 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसमें से केवल 2 प्रतिशत कचरा ही वैज्ञानिक तरीके से डिस्पाेज हाेता है।
केवल 10 प्रतिशत लाेगाें ने बेचा ई-कचरा
वैज्ञानिक तरीके से ई-कचरा डिस्पोज करने वाली संस्था के डायरेक्टर इम्तियाज अली ने बताया कि सबसे पहले जिला प्रशासन ने ई-अपशिष्ट प्रबंधन रैग पीकर्स उत्थान परियोजना कचरा उठाने की शुरुआत की थी। इसके लिए एक मोबाइल नंबर भी जारी किया था। इसके बाद भी 10 प्रतिशत लोगों ने ही कॉल करके ई-कचरा बेचा।
नियम और जुर्माना
- तीन लाख है जुर्माने का प्रावधान- पर्यावरण एक्सपर्ट सुदेश वाघमारे ने बताया कि ई-वेस्ट काे खुले में फेंकने या कबाड़ी को बेचने वाले पर 3 लाख तक की पेनाल्टी या एक साल की सजा प्रावधान है।
- नहीं है नियमों की जानकारी- ई-वेस्ट मैनेजमेंट रैगपिकर्स अपलिफ्टमेंट प्रोजेक्ट द्वारा कराए गए सर्वे में सामने आया है कि शहर की 86% आबादी को ई-वेस्ट के नियमों की जानकारी नहीं है।